FAQs

Blog

Inguinal Hernia and Hydrocele in Children

These problems are seen as swelling in the lower part of the abdomen or scrotum. If the swelling remains constant in size it is usually due to accumulation of fluid around the testis, known as hydrocele. However if the swelling increases in size on crying, coughing, straining at the time of defecation or lifting weight and reduces on remaining calm, then it is known as inguinal hernia. In hernia, intestines descend from the abdomen to inguinal canal and reduce on remaining calm.

There is a possibility of spontaneous resolution of fluid by the age of 2 years, hence we can safely wait till two years of age in hydrocele child. However, in case of hernia, the intestines can get trapped at any time, hence should be operated as soon as the condition is diagnosed(even in the newborn period).


Surgery in both these cases is similar and daycare surgery. In both these conditions, the passage through which fluid/intestines descend down is closed.

blog.png

Undescended Testis (UDT):

Undescended testis or cryptorchidism is a condition in which testis doesn’t drop and /or can not be brought into the scrotum with external manipulation. Before the male child is born, testes of the unborn baby are situated inside the tummy. They slowly move down into the scrotum through a small passage called inguinal canal during 7th month of pregnancy. Scrotal sac is cooler than the rest of the body temperature, which is ideal for the function of testis.

UDT occurs in 3% of newborn males and up to 21% of premature newborns. Most of the testis come down to the scrotum by 6 months of age. UDT can be found in belly, inguinal canal or perineal region. In 10-15% of the cases UDT is seen on both sides, while in 6% of cases, father also had the history of UDT.

UDT which is located at an abnormal is exposed to higher temperatures hence spermatogenesis is hampered. Abnormally located testis is more likely to get traumatized during day to day activity. Testicular torsion is also more common in UDT in which there is twist and reduction of blood supply which leads to eventual loss of the testis. UDT are having higher chances of cancer than normal.

UDT should be operated as soon as possible after 6 months of age. Orchidopexy is done as a daycare surgery. Laparoscopic orchiopexy is performed when testis can not be felt on clinical examination or can not be located sonographically.

It is very important to differentiate between retractile testis from UDT as former doesn’t require surgical correction.

Undescended-testes.jpg
DWEE-300x218.png

हाईपोस्पोडीयास क्या हैं?

हाईपोस्पोडीयास (Hypospadias) एक प्रकार की पुरुषों की गुप्तांग (Genitals) की जन्मजात खामी हैं । सामान्यत: लड़को के पेशाब का छेद लिंग की चोच पर खुलता हैं, इस में छेद लिंग के नीचे की भाग में खुलता है और चमडी उपर के भाग में बड़ी होती है । कई बच्चों में लिंग नीचे की तरफ मुड़ी हुई होती है, जिसको ‘कोर्डी' (Chordee) कहते हैं।

हाईस्पोरपाडीयास कितने प्रकार के हो सकते हैं ? हाईस्पोस्पाडीयास दिए गए <image> प्रकार के होते हैं।

जितना पेशाब का छेद पिछे की तरफ रहता है, इतनी इन्द्री ज्यादा मुडी हुई होती है।

यह तकलीफ बच्चो के जन्म होने के बाद बच्चो के डॉ. या माता-पिता द्वारा देखने में आता हैं।

यह हर ३०० पुरुष बच्चो में १ बच्चे में देखने को मिलता हैं।

हाईस्पोरपाडीयास के साथ दूसरी कौन सी बिमारी हो सकती हैं ?

हाईस्पोस्पाडीयास के साथ जन्मजात गोटी नीचे न उतरना और सारणगाठ (हर्निया) भी हो सकती हैं।

यह ऑपरेशन क्यो जरुरी हैं ? बालक के लिए सामान्य लिंग इसलिए जरुरी हैं।

(१) बालक बड़े होकर सीधी धार से पेशाब कर सके।

(२) बालक दूसरे बच्चे को देखकर अपने आप को कम ना समझे और उसपर मानसिक प्रभाव ना पड़े।

(३) विवाह के बाद संतान होने में तकलीफ ना पडे।

ऑपरेशन का मुख्य हेतु पेशाब का छिद्र लिंग की चोच पर लाने का होता है जिससे पेशाब सीधी धार से कर सके । इस ऑपरेशन में हुड की चमड़ी का प्रयोग करते है। इसलिए ऑपरेशन के बाद सुन्नत (Circumcision) किया हुआ दिखता हैं।

hypospadias.jpg

क्या ये ऑपरेशन मे जोरिवम हैं ?

- प्रत्येक छोटे अथवा बड़े ऑपरेशन की तरह इसमें भी जोखिम रहता है पर ज्यादातर बालको में बिना किसी तकलीफ के ऑपरेशन अच्छे से हो जाता है।

- १० में से १ बच्चे को ऑपरेशन के बाद पेशाब पहले की जगह से हो सकता है क्योकि लिंग के उपर की चमडी नाजुक होती है। इसके लिए दूसरा छोटा ऑपरेशन जरुरी हो सकता हैं ।

- ऑपरेशन के बाद पेशाब की धार पतली हो सकती है जिसके लिए थोडे समय के बाद पेशाब के मार्ग को बड़ा करने की जरुरत (Dilatation) पड़ सकती है।

- प्रत्येक ऑपरेशन की तरह इसमें भी चेप लग सकता हैं

ऑपरेशन के अलावा दूसरा कोई विकल्प है ?

नही, ऑपरेशन के अलावा कोई दूसरा इलाज नहीं है।

 

ये ऑपरेशन कब करने में आता है ?

- आमतौर पर १ वर्ष के बाद ऑपरेशन होते है, परंतु बालक को अगर जन्मजात बड़ी बिमारी हो तो ऑपरेशन करने में देर हो सकती हैं।

- अगर बालक कि इन्द्रिय बहुत छोटी हो अथवा इसके साथ गोली की बिमारी हो तो ऑपरेशन से पहले बालक के इन्द्रिय बड़ी करने की ईन्जेक्शन देनी होती हैं।

ऑपरेशन पहले और बाद में क्या करना होता हैं ?

- ऑपरेशन पहले बालक को ४-६ घण्टे भूखा रखना पड़ता हैं, ऑपरेशन के दिन बालक को अच्छे से नेहलाना जरुरी हैं।

- ऑपरेशन के लिए बेहोशी की दवा दी जाती हैं और ऑपरेशन के बाद तुरन्त दर्द ना हो उसके लिए कमर में और लिंग के पास इन्जेक्शन देते हैं।

- ऑपरेशन के बाद पेशाब की जगह १०-१२ दिन तक नली रखनी होगी, इस दौरान पेशाब के इन्द्रिय शिथिल रखने और कबजी ना हो उसके लिए दवा चालु रखते हैं।

- कभी पेशाब की नली ज्यादा दिन तक रखनी पड़ सकती हैं (१४-१६ दिन) जिसके लिए डॉ. आपको समझायेगें।

- ऑपरेशन के बाद बालक को सामान्य २-३ दिन में छुट्टी दे दिया जाएगा।

हॉस्पिटल से छुट्टी मिलने के बाद बालक के लिए क्या ध्यान रखना होता हैं ?

- जब तक पेशाब की नली शरीर में हो तब तक बालक साधारण हलन-चलन कर सकते हैं परन्तु बालक के खेलने, कुदने, दौडने से परहेज रखना हैं।

- पेशाब की नली के आजुबाजु में से पेशाब न निकले इसके लिए जरुरी हैं कि बालक संडास करते समय जोर ना लगायें । इसके लिए बालक को कब्ज नहीं होना चाहिए। नली बंद या पेशाब अटके नहीं उसके लिए रोज ज्यादा से ज्यादा पानी पिलाये।

- ऑपरेशन की जगह दर्द हो सकता है उसके लिए दवाई दी गई है। दवा से आराम ना मिले तो डॉ. को तुरन्त बतायें।

- यदि बालक को ज्यादा दर्द हो और दवा से आराम ना मिले तो डॉ. को तुरन्त बताये।

- ऑपरेशन के बाद ड्रेसींग या पेशाब के साथ खून दिखना सामान्य है, परन्तु खून बंद ना हो तो डॉ. को तुरन्त बताये।

- नली में पेशाब आना बंद अथवा नली निकल जाने पर भी डॉ. को तुरन्त सुचित करे।

- ऑपरेशन के बाद बालक को ढीला कपड़ा पहनावे जिससे बालंक को तकलीफ ना हो और ड्रेसीग गिला ना हो उसका ध्यान दे।

- छुट्टी के समय डॉ. आपको नली निकालने की तारीख दे उस तारीख पर जरुर आये।

ड्रेसींग निकालने के बाद क्या देखभाल करे ?

- ड्रेसीग निकालने के बाद इन्द्रिय पर लालास और सुजन होती है, जो समय के साथ चली जाती है।

- इन्द्रिय पर दिखने वाले टांके अपने आप गल जाएगे उसको तोड़ने की जरुरत नहीं है।

- घर में बालक के ऑपरेशन की जगह खून साफ अथवा टांका तोड़ने की कोशिश ना करे, नही तो चेप अथवा फिस्च्युला हो सकता हैं।

- रोज बताये गये जगह पर सुबह-शाम मलहम लगायें।

- ऑपरेशन के बाद डॉ.को समय से बताना जरुरी हैं।

Kidney Stones in Children:

What are Kidney Stones?

Kidney Stones are also known as Renal Calculi or Nephrolithiasis. They typically occur in Adults, but can affect Children as well and can occur even in Babies.

Kidney Stone.png

​What Causes Kidney Stones to form?

1) Low Urine Volume: When a child does not drink enough fluids, urine to become concentrated and dark in color. Increasing fluid intake will dilute the urine and decrease the chance of stone formation.

2) High Sodium Diet

3) Medications: Some medications may cause low Urinary Citrate. Urinary Citrate, a natural substance in the urine, protects against kidney stone formation. These include Furosemide (Lasix), Acetazolamide (Diamox), and high doses of Vitamin C.

4) Medical Conditions that can cause Kidney Stones: Metabolic abnormality predisposing to kidney stones. Hypercalciuria means the urine has a very high level of calcium.

- High salt in the diet can cause hypercalciuria.

- Some medications can cause hypercalciuria.

- Hypercalciuria is the most common genetic cause of kidney stones. Hypocitraturia means there are low levels of citrate in the urine.

- When Citrate is low in the urine, calcium and uric acid kidney stones can form.

Hyperoxaluria is where the Liver makes too much Oxalate leading to kidney stones made from Oxalate.

​Cystinuria is an inherited genetic disorder where there is too much of the amino acid cysteine in the urine that can lead to cysteine stones.

​Other: Hyperparathyroidism can cause too much calcium to be pulled from bones leading to high calcium in blood and urine.

5) Bowel or Gastrointestinal conditions

- In conditions that cause Chronic Diarrhoea, such as Crohn’s disease or Ulcerative Colitis, kidney stones are more likely to form due to the excessive fluid loss.

- Some Gastrointestinal diseases or surgeries, such as Gastric bypass surgery or inflammatory bowel disease, can cause the intestines to absorb more oxalate from foods and form Calcium Oxalate stones.

What is difference between stone in Adults and Children?

Stones are less common in children than in adults. Most children who develop kidney stones have an underlying condition that increases their risk of stones. Metabolic abnormality is seen in 70 - 90% of children with the stone disease.

When should we visit to Doctor?  The most common symptoms of Kidney Stones include:

o Pain in the Belly or Back

o Blood in the Urine (Hematuria) or Cloudy Urine

o Nausea or Vomiting, Fever

o Needing to rush to the bathroom to Urinate

However, some children, particularly young children, do not have any symptoms, and the Kidney Stone is found when an imaging test (like an X-ray or ultrasound) is done for another reason.

Risk Factors for Kidney Stones

Factors that place a child at increased risk for developing kidney stones are:

- Defects in the Urinary tract

- Family history of Stones

- Decreased water intake or long periods of Dehydration

- Repeated Urinary Tract Infection

- Diet high in Sodium and/or Protein

- Obesity, Decreased activity level

- Use of certain Medications

​​​​

How are Kidney Stones Diagnosed by Doctor?

- Medical History

- Physical Examination

- Renal Ultrasound: Most common Radiologic test used to diagnose a urinary tract stone. This is a painless test using sound waves to take pictures of the kidneys, ureters and bladder. The images created may show the location of the stone(s).

- CT Scan

- Kidney, Ureter, Bladder (KUB) X-ray

The doctor may also order a 24-hour urine collection that a special lab will evaluate to see what kind of stones your body is making.

How are Kidney Stones treated?

Mode of Treatment - Medical Management and /or Surgery, depends on the size, what it is made of, and whether they are causing symptoms or blocking the urinary tract.

​Small stones are likely pass on their own without treatment, but will often require pain control and encouragement to drink a lot of extra fluids to help the stone pass.

​Stones larger than 9 or 10 millimeters (about half an inch) or ones that block the urine flow may require surgery or hospitalization.

Treatments to eliminate the stone — One or more treatments can be used to eliminate a kidney stone. Shock Wave Lithotripsy is the first-line treatment in most cases.

- Shock Wave Lithotripsy: This treatment is first choice for kidney stones in many children. Lithotripsy is done by directing a high-energy shock wave toward the stone to break into fragments  and passage. The procedure takes about 20-30 minutes. Some children, although not all, are given Anaesthesia to prevent movement during the treatment. The success of Lithotripsy depends, in part, on the size of the stone; larger stones are more difficult to break up and sometimes need more than one treatment. It can take three months after lithotripsy for all of the stone fragments to pass.

- Percutaneous Nephrolithotomy: Large stones or stones that do not break up with Lithotripsy will require a minimally invasive surgical procedure to remove the stone. During the procedure, small instruments are passed through the skin (percutaneously) into the kidney to remove the stone. The child is given Anaesthesia for the procedure to prevent pain.

- Ureteroscopy: Ureteroscopy is a procedure that can be done if the stone is in the middle and lower portion of the Ureter. The Doctor passes a small instrument with camera through the urethra and bladder, into the Ureter. The stone can be removed or broken up into smaller pieces that can pass more easily.

KIDNEY STONE PREVENTION

​Children who develop a kidney stone have a significant chance of developing stones in the future between 30 and 65 percent.

- Blood and Urine Tests: After a child has had a Kidney Stone, blood and urine tests are performed to identify factors that can increase the risk of future stones.

Testing is not done until the child is at home, walking and playing normally, eating a normal diet, and has finished any treatment for Urinary Tract Infection (UTI).

Urine Metabolic profile after collecting urine for 24 hours to check amount of Calcium, Oxalate, Citrate and Uric Acid in urine.

- Stone Testing: If the child passes a stone or stone fragment, save it in a clean container. A lab can analyze the stone to determine the type, which can guide treatment. Based on what the stone is made of, one or more treatments might help to reduce the risk of future stones.

- Drink More Fluids: Drinking more fluids can help to decrease the risk of forming all types of kidney stones. The goal is to increase the amount of urine that flows through the kidneys and ureters and to lower the concentration of substances that promote stone formation.